नाम, उम्र,
शिक्षा, जाति वगैरह लिखने के बाद जनगणना अधिकारी ने पूछा – “ आप सोये हुए हैं या जागे हुए हैं ?”
“जी मैं
रात में ही सोता हूँ ।” भाऊ के कहा ।
“रात से
आपका क्या मतलब है ?“
“रात यानी
रात ! रोज होती है । आप नहीं जानते हैं कि रात क्या होती है ?!”
“देखिए हम
सरकारी नौकर हैं और इस समय ड्यूटी पर हैं । हम जानते हैं लेकिन नहीं जानते हैं, हम
सोचते हैं लेकिन नहीं सोचते हैं, हम नहीं मानते हैं लेकिन मानते हैं, हम दो पाए
हैं लेकिन नहीं भी हैं । आपको ही बताना पड़ेगा कि रात क्या है ?”
“जब चारों
ओर अंधेरा हो, चूल्हे ठंडे और रसोईघर बंद हो, नौजवान नशे में लुढ़के पड़े हों, जब
मोबाइल पर ‘बच्चे चार अच्छे’ के मैसेज आ रहे हों, जब सारा देश सो रहा हो, सिर्फ
सरकार और उसकी मंडली जाग रही हो । तो समझिए कि रात है ।“
“क्या ये
इसी देश की रात है !?”
“जी आपने
अभी कहा ना कि हम जानते है लेकिन नहीं जानते हैं ।“
“अच्छा !
तो आप रात में सो जाते है ?” क्या आपके घर में सब सो जाते हैं ?”
“हाँ, पूरा
मोहल्ला सो जाता है इसलिए हम भी सो जाते हैं । जब सब सो रहे हों तो अकेले जागने का
कोई अर्थ नहीं रह जाता है ।“ भाऊ ने कारण सहित जवाब दिया ।
“इसका मतलब
सबको नींद आ जाती है । सब सुखी हैं । यह नया स्टार्ट-अप है । “
“सुख-वुख
कुछ नहीं, आँखें बंद करके पड़े रहो तो नींद भी आ ही जाती है ।“
“आपको जान
कर खुशी होगी कि जल्द ही निंद्रा सुख-टेक्स लगाया जा सकता है ।“
“निंद्रा
सुख-टेक्स क्यों !?”
“सरकार का काम
है टेक्स लगाना । आपको लाडले-भाऊ टेक्स-पेयर भी बनाना है ।“
“मुझे समझ
में नहीं आ रहा है कि मैं सो रहा हूँ या जाग रहा हूँ !! “
“आप सो रहे
हैं । आँख खुली होने से केवल आँख खुली होती है । तमाम देश भक्त आँख खुली रखते है
लेकिन असल में सोये हुए होते हैं । आप भी देश भक्त हो ।“
“अगर मैं
इस बात से इंकार करूँ तो ?” भाऊ डर सा गया
।
“अपनी
रिस्क पर आप कुछ भी कर सकते हैं । (ईश्वर आपकी रक्षा करे )।“
सच बात यह
है कि भाऊ ने लगातार इतना ‘जागो जागो’ सुन लिया कि अब जागना जोखिम का हो गया है । उसे
जगाने वालों का षड्यन्त्र समझ में आ गया है । वो जागने को कहते हैं लेकिन चाहते
हैं कि लोग आँखे बंद रखें । अधिकारी ठीक कह रहे हैं । हर बात में रिस्क दिखाई देती
है । दस ग्राम सोना दो लाख तक पहुँच गया, भाऊ जरा सा चौंका और फिर सो गया । सोने
के भाव से उसे क्या मतलब ! शंकराचार्य ने आवाज लगाई ‘आओ बचाओ’ । उसने एक कान से
सुना और दूसरे से निकाल दिया । शंकराचार्य से उसे क्या लेना देना ! बनारस के घाट
पर तोड़फोड़ हुई वह नहीं जागा । अपुन को क्या ! चित्रकूट के मंदिर पर बुलडोजरों ने
सेवा की, वह सोया रहा । अब भगवान ही निबटें । मलमूत्र वाला पानी पी कर तमाम लोग मर
गए, भाऊ आँखें बंद किये लेटा रहा । सोचा ‘आया है सो जाएगा, राजा रंक फकीर’ ... । मानो
उसने तय कर लिया है कि कुछ भी हो जाए वह नहीं जागेगा ।
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