दिवाली की सफाई में बरामद कुछ पुराने दीपक एक तरफ पड़े त्यौहार की तैयारी देख रहे थे। तभी एक थैली भर नयी लाइटिंग आ गई, मेड इन चायना वाली । नयी लाइटिंग भी पुराने दीपक की तरह रौशनी देती है, लेकिन उनकी खास बात यह थी कि वह एक साथ जलती हैं, एक साथ बुझती हैं। आप जानते ही हैं कि संगठन में शक्ति होती है । फिर उन्हें तेल की भी जरूरत नहीं रहती है। लाइटिंग के आते ही माहौल में उत्साह और उमंग की एक लहर दौड़ गई। जो दीपक सुस्त पड़े ऊंघ रहे थे उनकी ऑंखें दुकान के शटर की तरह पूरी खुल गयी।
" आप लोग कौन हैं? " एक पुराने दीपक ने पूछा।
" हम जेन जी हैं। हमारे बारे में सुन तो लिया होगा आप लोगों ने?!" नई झालर ने कहा ।
" क्या आप वही हो जिनको पुलिस ने.... जंतर मंतर.... एक कचोरी दो समोसा...वगैरह !!"
" हाँ वही हैं। अब देखना इस घर में हम चट्ट से नयी रौशनी भर देंगे। यहां ठहरा हुआ अंधेरा फट्ट से छंट जाएगा। खुशियां दन्न से आएँगी । लड्डू-पेड़ा, पारे-गुझिया खाएंगे, लोग खुशी से पागल हो जाएंगे। " जेनजी झालर बोली ।
" अंधेरा फट्ट से छंटता है क्या!! हमने तो बहुत कोशिश की, रात रात भर उससे लड़ते रहे। तेल की आखरी बून्द तक लड़े लेकिन अंधेरा खत्म नहीं हुआ !" पुराने दीपक चौंके।
" बाइ द वे आप लोग कौन हैं... और यहाँ क्या कर रहे हैं ? " नई पीढ़ी ने पूछा।
" अब हम क्या बताएं! वैसे तो हम फाउंडर हैं। दीपक कह लो, दीपक छाप कह लो एक ही बात है। आप लोग तो अपनी भाषा में ही समझोगे। हम बेबी बूमर्स हैं। सरल भाषा में कहें तो हम बूढ़े हैं। तेल खतम हो गया, ढांचा बचा है । हमने अपने समय में पूरी कोशिश करी अंधेरा दूर करने की। जितना संभव था खूब जले। फिर नये तौर तरिके लेकर तुम्हारी पीढ़ी आ गई। लोगों ने तेल डालना बंद कर दिया और हम रीत गए। कभी घरों में हमारे लिये आले हुआ करते थे ... अब आले भी नहीं रहे। घर वालों ने पहले एक टोकरी में भर कर टांड पर सरका दिया । वहां पड़े रहे महीनों । अब सफाई चली तो वहाँ से उतार कर नीचे पटक दिया है। सुना है जल्द ही मार्गदर्शक मंडल में डाल देंगे। "
" भूल जाइए अंकल पिछली बातों को, अब हम आ गए हैं तो पूरी पर व्यवस्था बदल देंगे। जो पहले होता रहा है उसे अब नहीं होने देंगे।.... वैसे मार्गदर्शक मंडल में आप लोग किसका मार्गदर्शन करेंगे? "
" अब किसी को मार्गदर्शन की आवश्यकता कहां है! सबने एक मार्ग पकड़ लिया है और चले जा रहे हैं, जै माता दी जै माता दी । देश भर में कुमार्गी भरे पड़े हैं वे वर्ल्ड टीचर होने का दावा ठोंक रहे हैं। मान न मान, हम ही महान। एक बार किसी को पैरों पर खड़ा कर दो तो वह ऐसा स्टेचू बन जाता है कि हिलाना मुश्किल, चलता करने की तो सोच भी नहीं सकते हैं। एक जमाना था जब अलादीन का चिराग कह-कह कर खूब रगड़ा हमें । काम निकाल लिया और अब पहचानते नहीं! ऐसे में हमारा क्या भविष्य । किसी दिन काला कबाड़े वाला अपना भैंसा लेकर आएगा और हमें उठा ले जाएगा।" पुराना दीपक अपना दुखड़ा सुना कर चुप हो गया।
" आप ठीक कहते हो सर, डर तो हमें भी है। अगर सिस्टम ने बिजली काट दी तो दिक्क़त हो जाएगी ।"
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