सुबह सुबह अचानक खबर फैली कि कतिया फटाक से महान हो गया । पार्टी कार्यालय में शोक की लहर दौड़ गई । जो जहाँ था वहीं सन्न से खड़ा रह गया । कुछ ने अपने को चिमटी काटी और जाँचा कि वे नींद में तो नहीं हैं । पार्टी में पद-बाँट चल रही थी, बड़े बड़े चतुर, चकोर हुए जा रहे थे। कतिया के नाम की घोषणा हुई तो किसी को विश्वास नहीं हुआ। ऐसा कैसे हो गया यार !! कल तक तो कार्यालय में कुर्सीयाँ जमा रहा था, भाई जी का पान पत्ता ला रहा था आज अचानक पार्टी का प्रदेश उपसंचालक हो गया !! मैं खुद अभी पिछले हप्ते ही उससे मिला था। तब तक वह बिलकुल ठीक था । कपड़े वपड़े वैसे ही आर्डिनरी पहने था। अच्छी बुरी बातें कर रहा था, यहाँ तक कि मेरा हाल भी नहीं पूछा। बिल्कुल नार्मल था । हमने साथ में चाय पी एक एक बिस्कुट भी खाया। हमेशा की तरह पैसा वो देना चाहता था लेकिन फोन में नेटवर्क काम नहीं कर रहा था। वो छटपटा कर रह गया बेचारा । ऐसे मौकों पर सरकार की लानत मलामत नहीं करो तो लोगों का ध्यान फोन पर ही टिक जाता है। लिहाजा उसने दबी आवाज़ में शुरुवात केंद्र सरकार से की और नगर निगम पर आ कर दम लिया। इस बीच भुगतान कर दिया गया और उसने लम्बी सांस खींच कर मुझे सशर्त धन्यवाद दिया कि अगली बार मैं ही दूंगा। बिल्कुल नार्मल था । जमीन से जुड़ा प्रेक्टिकल आदमी हैं, मुझे मालूम है कि वो भूल जाएगा । हमारी जनता चुनाव परिणाम आने के बाद तुरंत वादे भूल जाती है। जनता की इज्जत कितनी भी बार लुट जाए उसे कुछ याद नहीं रहता है । इसी बात को लेकर वो जनता का जबरा फैन है। उनका सपना है कि जिस दिन कभी सम्भव हो गया तो वो जनता का अभिनंदन करने के लिए एमजी रोड़ पर एक रैली निकालेगा। उसे मालूम है कि ऐसा मुमकिन नहीं है । लेकिन वो पार्टी लाइन की समझ रखता है इसलिए छाती ठोक के झूठ बोलता है। जब उसके नाम की घोषणा हुई तो दूसरों की क्या बताएं वो खुद भौंचक रह गया । पत्नी ने कहा ख़ुशी की बात है जी ऊपरवाला सब देखता है । कतिया ने सुबह से चौथी बार आईने में शक्ल देखी, समझ में नहीं आया कि पार्टी ने इसमें क्या देख लिया। प्रदेश उपसंचालक की उम्मीद तो भाई जी लगाए बैठे थे!! बूंदी के लड्डू का उनका ऑर्डर वही लिखवा कर आया था । अब उनको कैसे मुँह दिखाएगा!
इधर भाई जी को भी समझ में नहीं आ रहा है कि क्या करें । बार बार जूता उठा कर दीवार पर लगी एक तस्वीर को घूर रहे हैं । मन तो बहुत कर रहा है कि एक्शन मोड में आ जाएं लेकिन हिम्मत नहीं हो रही है । कतिया से कई बार जूतों के फीते बंधवाए, मालिश करवाई और आज हाथ जोड़ना पड़ेंगे! हद्द है यार !! लोग देखेंगे तो कैसा लगेगा! अभी तक 'अबेओ कत्तू' कह कर आवाज लगाते थे, अब 'कतिया जी' कहना पड़ेगा! साला पोलटिक्स चल रहा है या मजाक समझ में नहीं आता है। पहले पता होता कि यह मौका आ जाएगा तो कतिया को दलित मान कर गरियाते नहीं रहते। मन नहीं माना तो उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष को फोन चिपकाया -" अरे भइया जी ये क्या कर दिये हो आप!! हम यहाँ तोप चमकाए बैठे थे और आपने कारतूस लोड कर दिया!! हमको नहीं बनाना था तो ना बनाते किसी अच्छे को बनाते। कतिया तो हमारा चपरासी है। हम इतनी बड़ी बड़ी मूँछें रखे हुए हैं, इनकी क्या इज्जत रह जाएगी अब ?
“तो कटवा दो मूँछों को । इतना नहीं समझते हो कि अब मूँछ का नहीं पूँछ जमाना है । राजनीति करना है तो समय के साथ चलना सीखो । एक दिन तुम भी प्रदेश संचालक बन जाओगे ।“ जवाब सुन कर भिया जी बिन पानी डूबने लगे । तभी पत्नी ने कहा – बाहर कार्यकर्ता आए हैं । बोले हैं कि कतिया जी मिलने आ रहे हैं !
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