गुरुवार, 26 फ़रवरी 2026

भाँग की तरंग और नंगे आदमी से होली

 


 

गनेसी काका कल शाम से ही छान रहे थे । समझे नहीं क्या !? भाई भँगेड़ी लोग भाँग पीने को भाँग छानना कहते है । मंडली में सभी ने छान रखी है । मस्ती का आलम है । सब हवा में उड़ रहे हैं । भाँग छाने आदमी को लगता


है कि वो हल्का हो गया है और हवा में उड़ रहा है । ये भाँग के नशे की विशेषता है । बिना पासपोर्ट हवाई यात्रा करना हो तो मौका मत चूकना, लपक के छान लेना । होली पर तो दस्तूर भी है । हाँ तो गनेसी ज्यादा ऊंचाई पर उड़ रहे हैं । बोले - हम जा रहे हैं संजीवनी पर्वत से जड़ी बूटी लेने । कोई पीछे मत आना, सीक्रेट मिशन है ।  

“अरे किसके लिए संजीवनी बूटी लेने जा रहे हो काका !?” एक पट्ठे ने पूछा ।

“बब्बा आरामदेव के लिए । लेकिन मिशन सीक्रेट है ।“

“उनको किसने तीर मार दिया ! बेहोस पड़े हैं क्या ?!”

“बेहोश नहीं हैं । नया हेल्थ टॉनिक बनाना है, संजीवनीप्राश । जो खाएगा अमर हो जाएगा ।“

“काका तुम भी सठिया गए हो । इतनी महँगाई में क्या करोगे अमर होके !?”

“हम अपने लिए नहीं कुछ नहीं चाहते हैं । सरकार के लोग, मंत्री लोग, अफसर लोग, सिस्टम के लोग अमर हो जाएं तो चुनाव का झंझट ही खत्म हो । जो जिस कुर्सी पर बैठ हो वह सदियों तक बैठ रहे । मजे में राज करो ।“

“और जनता का क्या ? काका रुक जाओ । ये नहीं होने देंगे हम ।“ सारे पट्ठे गनेसी काका को पकड़ कर खींचते हैं और दबोच लेते हैं । भाँग के बाद रबड़ी ऑक्सीजन का काम करती है । काका को कटोरा भर रबड़ी पीला दी जाती है ।

मीठे से भाँग ने और जोर मारा । काका अगली पायदान पर पहुँच गए, बोले - “बुलाओ रे ससुरे टम्प को, उसी से होली खेलेंगे। टेरीफ़ टेरीफ़ बोल के बहुतै रंगबाज़ी मचा रखी है दुनिया भर में। बिना भाँग के इतना पगलाता है ! समझते में नहीं आता है कि अन्नानास है या अंगूर, रतालू कहीं का । .... फोन लगाओ और बोलो कि फौरन आए काका होली खेलेंगे ।“

दो तीन लोग फोन लगते हैं । एक बोल  - लग गया काका, तुम बात करो ।

“हैलो, आजा टॅम्पू अपन होली खेलेंगे । हाँ हाँ रंग लगाएंगे । ...  अबे तुम लगाओगे पचास परसेंट तो हम भी लगाएंगे पचास परसेंट । बराबरी से चलेगा, ... होली बिजनेस नहीं है । होली युद्ध भी नहीं है । होली पर बड़ा छोटा कोई नहीं होता है । ... ... ठीक है आजा जल्दी से ।“

“क्या हुआ काका ?!”

“आ रहा है । कह रहा था मैं पचास परसेंट रंग लगाऊँगा तुम जीरो परसेंट लगाना । ... हमें बेवकूफ समझता है लंगूर कहीं का । होली खेल रहे हैं कोई मजाक नहीं कर रहे हैं । ... आएगा तब बताएंगे ।“

“वो टम्प है काका । क्या करने का सोच रहे हो ?”  

गनेसी काका गंभीर हो गए , बोले - “वो आए उससे पहले दो ट्राली गोबर ले आओ जरा। वो टेरीफ का कीचड़ लगाता है हम गोबर नहीं लगा सकते क्या!! पहले गोमूत्र वाली भाँग पिलाएंगे ससुरे को। जब चढ़ जाएगी तो बरसाने की लट्ठमार होली में ले जाएंगे। मार मार के बैठक लाल न कर दी तो लठ वाली मथुरानियों का नाम नहीं। उसे साफ बता देंगे कि होली पर बुरा मानना मना है।“

“फिर भी बुरा मान जाएगा काका ।“

“नहीं मानेगा, कह देंगे कि शांति से रंगवा लोगे तो हाथोंहाथ नोबल दे देंगे । रखा है घर में ।“

“बड़ी तेज चलती है काका तुम्हारी खोपड़ी ! “

 “पट्ठे तुम उसके कपड़े उतर देना फट्ट से,  हम गोरे को पंचरंगी कर देंगे।“

 कपड़े उतारने की क्या जरूरत है काका । उसका नाम एपीस्टीन फाइल में दर्ज है।“

“फिर क्या करें  ?”

“हम तो कहते हैं जाने दो काका । नंगे आदमी से भगवान भी डरता है। अगली होली पर देखेंगे ।“  कहते हुए पट्ठे ने एक गिलास और भरा काका के लिए ।

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