राजनीति के
तांत्रिक जानते हैं कि चुनाव लड़ना असल में जिन्न जगाना है। जिन्न समझते ही होंगे,
क्या होता है? हाँ तो महंगाई, बेरोजगारी जैसे मुद्दे विपक्ष के छाती कुटवा कार्यक्रम होते हैं। चुनावी
जिन्न जो है मुर्गा मछली खाने और परोसने की रील देख कर प्रसन्न हो जाता है। जी हाँ,
जिन्न के पास मोबाईल फोन होता है। वह भी रोज तीन जीबी डाटा खाता है।
वोटर कभी झालमुड़ी के नाम पर खुश हो जाता है कभी अंडा मच्छी देख कर। आपके मन में
सवाल आप रहा है कि कैसे !! जिन्न आज के वोटर में घुस जाता है और उससे गवाता रहता
है - हम भी तेरे, दिल भी तेरा, वोट भी
तेरा ।
वक़्त आने
पर सबको पता चल जाएगा कि असल में इवीएम एक चिराग है। सब जानते हैं चिराग जिसके हाथ
में होता है जिन्न उसका होता है। आप देखिएगा जब मतगणना वाले दिनभर चिराग रगड़ेंगे
तो शाम को जिन्न निकल कर कहेगा "क्या
हुक्म है मेरे आका "। जहाँ जहाँ भी हमने चिराग दबा कर रगड़ा है वहाँ वहाँ
जिन्न बाअदब हमारे कदमों में आ कर बैठा है। इसे जादुई चिराग कहा जाता है। लेकिन
चिराग का जादू हमारे आलावा कोई नहीं जानता है। किताबें उठा कर देख लो,
जिन्न हमेशा अपने आका का हुक्म मानता है।
हमारा जिन्न अभी कड़ी सुरक्षा में सांसे ले रहा
है। बाहर सरकारी पहरा है। सरकारी पहरे के ऊपर हमारा पहरा है। हमारे पहरों पर और
दूसरे लोगों के पहरे हैं। इन लोगों के पहरे पर फिर हमारा पहरा है। ऊँची ऊँची
बिल्डिंगों से दूरबीनें तान रखी हैं, और
बंदूकें भी। हवाएं खामोश हैं, अंधेरे सहमें हुए हैं। सात
तलों में सोया है जिन्न और जिन्न में बसी है हमारी जान । जब वो उठेगा तो मिडिया
ढ़ोल बजाएगा, अखबारों में हेड लाइन सजेंगी। जगह जगह मछलियाँ
और मीट बंटेगा, और हाँ झालमुड़ी भी।
भूल गए हो
तो आपको बता दें कि चिराग के जिन्नों से हमारी पार्टी का पुराना नाता है। आप लोगों
को जानकारी नहीं होगी कि ज्यादातर जिन्न अकेले होते हैं । उनकी कोई बीबी-वीबी नहीं
होती है। वो फुल टाइम सेवक होते हैं । उसके जीवन का लक्ष्य ही हम सब लोगों की सेवा
करने का है। चुनावों में हम जब भी चिराग
को रगड़ते थे वह सर झुकाए हाजिर हो जाता था और जो कह देते थे वो कर डालता था ।
जिन्न जो हैं बहुत आज्ञाकारी होते हैं, मालिक
के प्रति वफादार होते हैं और इसलिए देशभक्त भी होते हैं। जिन्न के कामों की कोई
सीमा नहीं होती है। उससे कुछ भी करा लो वो कभी मना नहीं करता है। लोग कहते हैं कि
जिन्न बुरे होते हैं। खासकर विपक्ष में बैठे लोग पानी पी पी कर जिन्नों की आलोचना
करते हैं। लेकिन इन लोगों को नहीं पता है कि जिन्न आलोचना नहीं समझते हैं। सच बात
तो ये है कि वे कुछ भी नहीं समझते हैं। उनका दिमाग़ प्राकृतिक नहीं प्रोग्रामिंग
किया हुआ होता है। अंदर ही अंदर विपक्षी दल चाहते हैं कि उनके पास भी अपना चिराग
हो, वो भी रगड़ें तो फटाक से उनका जिन्न निकल आए। लेकिन उनके
पुराने नेताओं ने धर्म की बजाए विज्ञान को पकड़ा। इसमें हमारी क्या गलती है भाई! जो
रास्ता आपने चुना है उसका खामियाजा तो भुगतना पड़ेगा। जिन्नों को विज्ञान कतई पसंद
नहीं है। सुना है अब रोबोट को जिन्न कि तरह इस्तेमाल करने का विचार चल रहा है !!
लेकिन उन्हें मालूम नहीं है कि रोबोट जिन्नों की बराबरी नहीं कर सकते हैं। रोबोट
पर 'हेंडल विथ केयर ' लिखा होता है,
रगड़ोगे तो मेकेनिक आएगा जिन्न नहीं।.... खैर, आप
लोग फ्री बैठे हैं, काम धंधा है नहीं, तो
एग्जिट पोल देखिये। यहाँ प्रेम और भक्ति के साथ जिन्न चलीसा का पाठ हो रहा होगा ।
-------
.jpg)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें