गुरुवार, 7 मई 2026

झालमुड़ी डेज


 


घोष बाबू रोज की तरह टीवी ताने बैठे हैं। टीवी तो मंथली रिचार्ज से चलता है। घोष बाबू किस रिचार्ज से चल रहे हैं पता नहीं। बंगाल से बाहर बैठा बंगाली बंगाल में ही होता है। बोलते हैं टीवी मुझे नहीं छोड़ता है। लेकिन मिसेस घोष का कहना है ये टीवी को नहीं छोड़ रहे हैं। माछेर झोल और राशोगुल्ला भी अब असरदार नहीं है।

"और क्या चल रहा है घोष बाबू? " सुखवीन्दर ने आते ही पूछा।

"आपको मालूम नहीं!! सब तरफ झलमुड़ी चल रहा है।" सुखवीन्दर पर एक नजर डालते हुए जवाब दिया।

" ओ बादशाओ मैं आपका हाल-चाल पूछ रहा हूं। "

 "हाल-चाल भी झालमुड़ी हैं। मतलब झालम झाल है, टीवी पर खबरें कम झाल ज्यादा चल रही है।"

 "फुर्सत में हो क्या? चलो।" सुखवीन्दर से सोचा थोड़ा टहला जाए साथ साथ।

 "फुर्सत कहाँ है, टीवी देख रहा हूं। "

" टीवी देखना भी कोई काम है!... क्या देख रहे हो?

"झालमुड़ी।... हर चैनल पर झालमुड़ी ही है। "

"अरे क्या झालमुड़ी झालमुड़ी!! चुनाव हो गए, सरकारें करीब करीब बन गई। अब क्या बचा  है देखने को!"

" झालमुड़ी बची है ना।... चुनाव से ज्यादा धमा धम अब हो रही है। बंगाल का झालमुड़ी में बड़ा जोर हैं।"

" छोड़ो प्राजी, चल्लो आपको लस्सी वस्सी पिलवाते हैं। दिमाग़ ठंडा हो जाएगा जी।  अब खबरों से क्या हासिल होना है। " सुखवीन्दर ने दबाव डाला।

" पहले एक बात बताओ, चुनाव का हासिल क्या है? "

" चुनाव का हासिल तो सरकार है घोष बाबू।"

"अरे सरकार तो पहले भी थी। थी या नहीं?... देश को नया क्या हासिल हुआ?...

"आप ही बताओ।"

  " झालमुड़ी। "

" पहले तो आप बाद  महंगाई के आलावा कोई बात नहीं करते थे घोष बाबू !!"

 " अरे समझते नहीं हो!! महंगाई इसमें कवर हो गया ना। झालमुड़ी का रेट दस रुपया फिक्स है प्याज़ के साथ । दस में गरीब भी खा सकता है। अब महंगाई कहाँ है! एक ही झटके में महंगाई खतम ।..."

"फिर भी दो रोटी की समस्या तो है ही। कोई रोज-रोज झालमुड़ी थोड़ी खा सकता है। रोटी तो चाहिए ही। "

" अब झालमुड़ी आ गई, रोटी का क्या काम। ब्रेक फ़ास्ट झालमुड़ी, लंच झालमुड़ी, डिनर झालमुड़ी। शादी सगाई झालमुड़ी, तीसरा तेरही झालमुड़ी। चाट बाजार झालमुड़ी, होटल फाइव स्टार झालमुड़ी ।... उसके बाद भी किसी को रोटी चाहिए तो... मेक एफर्ट एंड इन्जवाय... कोई रोकेगा नहीं। फ्रीडम है... पक्का वाला लोकतंत्र... यू नो। "

" और रोजगार का क्या!? जवान बच्चे पढ़ लिख कर खाली हाथ बैठे हैं!!"

" क्यों बैठे हैं! चाय पकौड़ी बनाते बेचते। अब झालमुड़ी बेच सकते हैं। ऑप्शन है, फिर कहोगे विकास नहीं हुआ! लोग अपनी इच्छा से बेरोजगार रहना चाहे तो उसके लिए कांग्रेस के आलावा कोई भी सरकार जिम्मेदार नहीं है। "

" कैसी बातें कर रहे हो दादा आप! अस्पताल, स्कूल कालेज... इनको भूल गए! "

" झालमुड़ी खाने से कोई बीमार नहीं होता है। सरसों का तेल सेहत के लिए अच्छा  है। हमारा माछेर झोल सरसों के तेल में ही बनता है। झालमुड़ी खाओ स्वस्थ रहो, मस्त रहो।... तुमको एलर्जी है क्या झालमुड़ी से? "

" ना जी ना, हमारी देशभक्ति पर शक न लाओ। मैं तो पहले दिन से ही खा रहा हूं झालमुड़ी, प्याज़ डाल के।... आप ऐसी बात ना किया करो दादा,  दीवारों के भी कान हुआ करते हैं।" सुखविंदर ने उठते हुए धीमी आवाज में कहा।

 

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