शुक्रवार, 22 मई 2026

यूँ ही कोई मिल गया था... चलते चलते


 



पम्प पर अपनी सफ़ेद स्कार्पिओ में फुल टेंक करवा के गनसिंह गनगने बिल चेक कर रहे थे तभी उनकी नजर हम पर पड़ी। बोले - तुम इधर कैसे? 

" पेट्रोल लेने वालों से सवाल पूछ रहा हूँ, अख़बार के लिये बाइट । "

" क्या बोल रहे हैं ? "

" भाव बढ़ गए हैं इसलिए खुश नहीं हैं। "

"डीजल पेट्रोल का भाव कितना भी हो जाए किसीके मूँ से न चूँ नहीं निकलना चिये । पाँच सौ का मिलेगा तो भी कोई दिक्क़त नहीं है, पाँच हजार का मिलेगा तो भी चलेगा। देशभक्ति चीख चीख के पुकार रही है, सबको साथ देना पड़ेगा । " 

" लोग नाराज हैं। महंगाई बढ़ रही है।"

" कौन नाराज है? कोई हिम्मत कैसे कर सकता है नाराज होने की। नाम पते बताओ उनके।... क्या पुराने जमाने में रह रहे हैं लोग !! देशप्रेम पहले, पेट्रोल डीजल बाद में। ये बात हरेक के दिमाग़ में आना जरूरी है। आई समझ में? एक बात समझ लो, एकता में शक्ति होती है। सबने मिलके थाली बजाई , ताली बजाई तो करोना खतम हो गया।  खतम हुआ कि नहीं? "

" हुआ जी हुआ। "

" इसी तरह किसी दिन सबसे थाली बजवा देंगे तो महंगाई भी खतम हो जाएगी। कोई बड़ी बात थोड़ी है।" वे सीना चौड़ा करते हुए बोले। 

" तो जल्दी बजवा देना चाहिए। कहीं कांग्रेस वालों को आइडिया आ गया तो फटाफट सरकार बना लेंगे।" 

" उनको कैसे आ सकता है आइडिया!! वो क्या जमीन से जुड़े हैं! वो क्या जनता कि नब्ज पहचानते हैं। इनके पास काबिल नेतृत्व होता तो थाली बजा कर अंग्रेजों को बहुत पहले भगा देते।" उन्होंने बड़ा पॉइंट बताया। 

" गाँधी जी तो थे कांग्रेस के पास। मतलब काबिल नेतृत्व ...। " उन्हें याद दिलाया। 

" कांग्रेस के पास गाँधी कब नहीं रहे! लेकिन नए नए आइडिया तो अब आ रहे हैं जब कांग्रेस सत्ता में नहीं है। देश सोने की चड़िया था किसी जमाने में। "

" हाँ जी, प्राचीन काल में था। किताबों में लिखा है।" 

" तो अगर हमें देश को फिर से सोने की चिड़िया बनाना है तो किधर जाना पड़ेगा? वापस पीछे जाना पड़ेगा या नहीं? " 

" कोई देश वापस पीछे कैसे जा सकता है?!.. सर। "

" यही तो आइडिये कि बात है। कोशिश करने से क्या नहीं हो सकता है। हमेशा आगे बढ़ोगे तो एक दिन खाई में भी गिर सकते हो।... मान लो तुम्हारा बटुआ पार्क के गेट पर गिर जाए और तुम आगे निकल जाओ तो बटुआ लेने वापस यानी पीछे जाओगे या नहीं? " 

" हाँ जी, ठीक बात है। लेकिन दुनिया तो आगे बढ़ रही है!"

" दुनिया में हरेक के पास बटुआ नहीं है। हमारे पास था, इसलिए हमें उसकी फ़िक्र है। " 

" लेकिन बटुए में पुरानी करंसी होगी। आज कि जरूरत अलग है। समय के साथ चीजों में बदलाव होता जाता है। इसी को विकास भी कहते हैं। " 

" लगता है तुम वामपंथी हो!!"

"  वामपंथी !! ये क्या होता है सर जी?!! " 

" पता तो मेरे को भी नहीं है। पर होता है कुछ कोरोना जैसा, जिसको खतम करना जरूरी है। कोई वामपंथी मिले तो बताना। " उन्होंने ऊँगली दिखाते हुए हिदायत दी। 

" बिलकुल बताऊंगा सर। आप तो ताली बजवा देना, सब साफ हो जाएंगे दन्न से।"

"  तुम जबरन अपना दिमाग़ मत लगाओ ! अपना समय खराब कर रहे हो! जगह जगह भटक कर बाइट ले रहे हो! इतनी मगजमारी किसलिए!! गोदी में आ जाओ सब झंझट खतम। .... और ये भी देशभक्ति है..... आज कि डेट में। " 


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