एक बड़ा
युद्ध देखने के बाद टमचू को फिर नोबल की याद आ गई। तुरंत उसने अपने को सांत्वना दी
कि नया-नोबल कोई ‘शरीफ ‘ बंदा दे देगा। ज़ख्मों पर पट्टीयां लगवा कर डील
के पहले ही उसने युद्ध समाप्ति की घोषणा की । यह युद्ध शांति के लिए था । समझो
पटाखे खतम दिवाली खतम ।
हर पल एक नया झूठ टमचू का सच है । उसने दिन में
दस बीस झूठ बोल कर दुनिया भर के दूसरे झूठे नेताओं को पीछे छोड़ दिया है । हाल ही
में उसने कहा कि शांति और प्रेम उसकी प्राथमिकता है। गॉड की जगह खुद को चेंपते हुए
उसने पोस्टर के जरिए प्रेम और शांति की आक्रामक पेशकश की। उसे लगा कि अगर वह पूरी
दुनिया में उथल पुथल मचा सकता है तो किसी गॉड से कम नहीं है। गॉड न युद्ध कर सकता
है न रोक सकता है। यह दोनों काम टमचू ने दुनिया को कर दिखाए हैं। उसके दिमाग में
इस विचार की कौंध हुई कि वह गॉड से बड़ा है। बल्कि उसे ही गॉड होना चाहिए। पोप
वाले हों या तोप वाले हों सबको यह बात मान लेनी पड़ेगी । वैसे गॉड है क्या,
पोस्टर ही तो है। भक्तों के लिये तो पोस्टर ही गॉड है। टमचू अब हर पोस्टर
में गॉड की जगह खुद आ जाता है। लोगों ने बीमार के सर पर हाथ रखे टमचू को देखा । ज्यादातर
लोग समझ नहीं पा रहे हैं कि उस बेचारे की
जान क्यों ले रहा है । सभ्यता को मिटा देने की उसकी पवित्र सनक गॉड को भी डरा सकती
है। गॉड के पास तो सेना ही नहीं है ! टमचू बड़ा गॉड है, उसके
पास बड़े हथियार और बड़ी सेना है। उम्मीद है कि जिंदाबाद करने वाली जनता अब उसकी
पूजा करने लगेगी । वह गॉड होने के करीब हो जाता है। उसके द्वारा किया गया युद्ध और
गलतियां अब गॉड की हो जाती है। युद्ध बंद करने की घोषणा वह गॉड बन कर करता है।
ताकतवर
देशों में सेना शांति और प्रेम की बुनियाद है। आप जानते हैं कि दो देशों के बीच
सैन्य शक्ति की लगातार होड़ होती रहती है। दरअसल हथियारों कि यह होड़ शांति बनाए
रखने के लिये होती है। भारत वाले मानते हैं कि “भय बिनु होई न प्रीति “। और
यह केवल किसी पवित्र किताब की पंक्ति भर नहीं है। आज जनता किसी पार्टी या नेता को
जो प्रेम दिखा रही है तो लगता है वह कहीं गहरे तक पैठे भय के कारण है। देसी देशभक्त
मानते हैं कि जितना भय बढ़ेगा उतनी प्रीत बढ़ेगी।
हमारे नींबू पेलवान पिछले दिनों भारी मतों से जीत गए। पता चला कि जिन-जिन
को उन्होंने ठोका-पीटा था उन्होंने सबसे पहले जाकर वोट दिया। और भगवान कसम उन्हें
ही दिया । प्रीत प्रेरित राजनीति हमारा
आविष्कार है । यही फार्मूला टमचू को भी ठीक लग रहा है। क्यों नहीं लगेगा ! हम करीब
करीब विश्वगुरु जो हैं । दुनिया भर के तमाम देश परस्पर प्रीत बनाए रखने के लिए रात
दिन प्रयासरत हैं। अमेरिका और चीन में प्रीतबाजी शुरू हो गई है । जल्द ही दो
प्रेसीडेंट झप्पियाँ डालेंगे और अक्कल दाढ़ भी गिनेंगे । आप चाहें तो इसे चमत्कार
कह सकते हैं ।
कहा जाता
है कि नंगे से गॉड भी डरता है। जिन दिनों टमचू घुड़क रहा हो तो गॉड युद्ध के मैदान
से दूर रहता है। पता चला है कि टमचू सनकी नहीं गजब का प्रेमी भी है। मौका मिल जाए
तो बिना किसी हिचक के छोटी-बड़ी बच्चियों से प्रेम कर डालता है। फाइलें न भी पड़ी हों
तो दुनिया को विश्वास है । वह जानता है कि प्रेम के लिये अंदर की साइड प्रेम होना
जरूरी है। वो गरीबों का हमदर्द है । ऊपर से भले ही पूंजीवादी है लेकिन अंदर लाल
चड्डी पहनता है । डील के लिए जब वह जाएगा तब हरी चड्डी पहन लेगा । ऐसा सुना गया है
कि युद्ध के दौरान लांड्री को पीली चड्डियाँ भी बरामद हुई । लेकिन किसकी थी पता
नहीं चला है ।
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