रविवार, 19 अप्रैल 2026

लंबी लंबी छोड़, ऊंची ऊंची उड़ा


 


 

पुराने समय में कहा जाता था कि झूठ के पाँव नहीं होते हैं । लेकिन इन्टरनेट के जमाने में अब झूठ के पंख होते हैं ! झूठ मुआ बड़ा स्मार्ट हो गया है । डेढ़ जीबी डाटा में झूठ दिन भर ऐसे छाती ठोक के आता जाता है जैसे सच का बाप हो । चुनाव का मौसम है तो विशेषज्ञ बिना किसी झिझक के मानते हैं कि झूठ का मौसम है । दिल्ली झूठ की राष्ट्रीय मंडी है । पुराने दिल्लीबाज़ कभी किसी पर विश्वास नहीं करते हैं । उनका तजुरबा है कि जो जितनी लंबी लंबी छोड़ता होता है उसकी पतंग उतनी ऊंची ऊंची उड़ती है । कहते हैं झूठ हजार बार बोला जाए तो उसका सिक्का सच की तरह चलने लगता है । तकनीकी विकास ने झूठ के बाज़ार को रॉकेट लगा दिये हैं । इधर से झूठ का ‘भाइयों-बहनों’ डालो और उधर से सचमुच की सत्ता निकाल लो । हर हाथ में झूठ की फेक्ट्री है और हुनर तो दे ही रखा है उप्पर वाले ने । एक झूठ पंद्रह मिनिट में सच की फसल हो जाता है । आज की जनता जिसके अंदर रियाया होने के जींस अभी भी अंगड़ाई ले रहे हैंमानती है कि महाराज न सही महराजनुमा पीढ़ी दर पीढ़ी ईश्वर के प्रतिनिधि हैं । सो महाराजनुमा की ही जय हो । देने वाला श्री भगवान होता हैचाहे वो देने का वादा करे और न भी दे । संत कह गए हैं कि जगत मिथ्या है तो राजपाठ भी मिथ्या हैवोट भी मिथ्या है । जीवन चार दिनों कावह भी समझो भ्रम है । गालिब ने कहा है कि दो आरजू में कट गए दो इंतजार मेंहासिल कुछ भी नहीं हुआ । जब गालिब को नहीं हुआ तो बाकियों को क्या होगा ।

 

जिन खोजा तिन पाइयागहरे पानी पैठ ; मैं बपुरा बूरन डरारहा किनारे बैठ । तो फिर खोजें  सत्य क्या है !आवाज आई ‘बच्चा राम नाम सत्य हैसबसे बड़ा सत्य परलोक है’ । शरीर झूठा है आत्मा सच्चीजब मौका मिले फटाफट निकल्ले । सपनों से बड़ा कोई सुख नहीं और जो सुखदाई है वही सच है । सपना चाहे जन्नत में बहत्तर हूरों का हो या बहत्तर हजार रुपए सालाना मुफ्त खाते में आने का होसुखदाई है । झूठ के व्यापार की जमीन हमेशा हरी होती है । गधे आँखें बंद करके इस इरादे से चरते हैं कि सारी की सारी मैं ही चर लूँगा । और आश्चर्य की बात यह कि बिना चारा वे मोटे भी होते रहते हैं । इधर तो सबकी आँखें बंद हैं । किसी का ये खतरे में है तो किसी का वो खतरे में है । लेकिन खतरे का सच यह है कि कोई खतरे में नहीं है । हर पार्टी डर और विश्वास के बीच अपना अपना इंसुलीन बेच रही है । वह माने बैठी हैं कि उनके प्रति एक भरोसा है सबके दिमाग में । इस फर्जी भरोसे को उन्हें बस जिंदा रखना है चुनाव तक । उसके बाद लोगों की आँखें खुलती हों तो खुल जाएँ कोई फर्क नहीं पड़ने वाला ।

 

 लोहे से लोहा कटता है । फर्जी सामग्री की काट फर्जी सामग्री है । इधर फर्जी तो उधर भी फर्जी । वोटर को जब तक समझ में आएगा तब तक लीडर चुग जाएगा खेत । बस आप खामोश रहिए । जनसंख्या एक सौ चालीस करोड़ है लेकिन यह सच नहीं है । गरीबीमहंगाईबेरोजगारी सच नहीं है । हत्या और बलात्कार भी सच नहीं हैं । बेईमानीभ्रष्टाचार तो कतई सच नहीं हैं । रेडियो पर कोई गा रहा है  “कुछ ना कहोकुछ भी ना कहो ।  क्या कहना हैक्या सुनना है । मुझको पता हैतुमको पता है । समय का ये पलथम सा गया है और इस पल में कोई नहीं है  बस एक मैं हूँ । बस एक तुम हो 

 

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