जब
जहाज डूबता है या युद्ध गले की हड्डी बन जाता है, तो मोटा चूहा पहले भागता है ।
मीडिया ने यह बात फैला रखी है, लेकिन चूहों को इससे कोई फर्क
नहीं पड़ता। वे अब बदनामी को मस्त ओढ़ते-बिछाते हैं। वैसे भी, जनता अब बदनामी को ही लोकप्रियता मानने लगी है। जानकार बताते हैं कि
दुनिया भर में चूहे ही राज कर रहे है। वे ज़माने लद गए जब चूहों को सिर्फ चूहा
समझा जाता था । आज के दौर में जब दो चूहे वैश्विक मंच पर मिलते हैं, तो 'कुतरन एग्रीमेंट' पर
हस्ताक्षर होते हैं— "तुम मेरे यहाँ कुतरो, मैं तुम्हारे यहाँ कुतरूँगा।" ये समझौते और सहमतियाँ फाइलों में दर्ज
होती हैं, क्योंकि जहाँ कुतरने की डील होती है, वहाँ फाइलें अनिवार्य होती हैं।
फाइलों
से चूहों का नाता बहुत पुराना है। चूहों के असली नाम कभी सार्वजनिक नहीं होते; बस फाइलें
ही उनका 'आधार' जानती हैं। यही फाइलों
की असली ताकत है। कुछ फाइलें तो 'नगरवधू' की तरह होती हैं, जिनको सूंघते हुए चूहे सात समंदर पार से गाते हुए खिंचे
चले आते हैं — "सलामे इश्क मेरी जान जरा कबूल कर लो,
तुम हमको प्यार करवाने की जरा सी भूल कर लो।" फाइल के करीब आने के
बाद देसी और विदेशी चूहों को अहसास होता है कि वे तो 'ब्रदर-इन-आर्म्स'
हैं। फाइल के हमाम में सारे नंगू चूहे और नंगू होते हैं। बिल्ली के
डर से चूहे फाइलों को इस कदर कुतर देते हैं कि सबूत की 'अस्थियाँ' भी न बचे। जब कभी कोई फाइल बाहर आती है, तो देखने
वाले समझ जाते हैं कि चूहों ने अपना मुंह काला कर लिया है। जो मामला वर्षों से टल
रहा होता है, वह कुतरी फाइलों के कारण मजे में दबा रह जाता
है।
इधर
बिल्लियाँ खा-खाकर 'मोटापे' और 'आलस' का शिकार हैं। वे ज्यादातर समय आँखें बंद किए 'सिस्टम'
की गोद गरम किये रहती हैं। लोग गोदी मीडिया का आरोप लगाते हैं
उन्हें जान कर खुशी होगी कि गोदी सिस्टम भी मौजूद है । बावजूद इसके चूहे अब बिल्ली
से नहीं बल्कि फाइलों से डरते हैं। एक चूहा दूसरे को फाइल के हवाले से डराता है,
और कुछ बुद्धिजीवी इसी 'डराने-धमकाने' के खेल को राजनीति कह देते हैं। जिसे हम 'दफ्तर'
कहते हैं, वह असल में चूहों का 'बैटलफील्ड' है। यहाँ चूहे 'ऑर्गनाइज्ड
गैंग' बनाकर कुतरते हैं।
चतुर
चूहे बहुत फुर्तीले होते हैं। जब कोई अलमारी खोलता है, तो उसे
फाइलें कम और करतूतों की कुतरन ज्यादा मिलती है। फाइलों में कारोबार और लेन-देन का
ब्यौरा होता है। ज्यादातर चूहे कारोबार में कम, लेन-देन में ज्यादा
यकीन रखते हैं। यदि किसी जहाज में ये चूहे लग जाएँ, तो उसे
डुबोकर ही दम लेते हैं। पिछले दिनों एक राज्य में करोड़ों का भारी-भरकम पुल चूहे
खा गए और बिल्लियाँ सोती रहीं। हद तो तब हो गई जब जप्त की गई लाखों शराब की बोतलों
के ढक्कन कुतरकर चूहे सारी शराब गटक गए और बिल्लियाँ सोती रहीं। अस्पतालों से
करोड़ों की दवाएं बॉक्स समेत खा गए और तब भी बिल्लियाँ सोते हुए सबका साथ सबका
विकास नामक सपना देखती रहीं । चूहे अब जादूगर हो गए हैं; वे
कभी सूट पहनकर, कभी टाई लगा कर तो कभी गलें में दुपट्टे डाल कर आते-जाते हैं।
बिल्लियाँ सो रही हैं, इसलिए चूहों को लगता है कि राज उनका ही
है। वे मानते हैं कि 'संगठन ही शक्ति' है।
अगर वे शक्ति प्रदर्शन पर आ जाएं, तो पूरा शहर कुतर सकते हैं
। किसी दिन संगठित चूहे कानून की पूरी किताब को ही कुतरकर कूड़ा कर सकते हैं। जब मेहनती
मूषक जमीन खोदेंगे, एक गाँव नहीं, एक शहर नहीं, एक देश नहीं, पूरी दुनिया खोदेंगे
।
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