सोमवार, 6 अप्रैल 2026

जगत जीजा की दुनिया में साले ही साले


 



कुंवारा आदमी साला विहीन होता है। शादी करके जो पत्नी को छोड़ देते हैं उनके साले रिश्तेदारी के सम्बोधन से खिसक कर गाली हो जाते हैं। सालों का सुख शादीशुदा को मिल ही जाता हो यह जरूरी नहीं है। कुछ लोगों को साले थानेदारों की तरह मिलते हैं। इसी रौबदाब के चलते सालों का मार्केट बहुत हाई बना रहता है। जिसने भी कहा है कि "सारी खुदाई एक तरफ जोरू का भाई एक तरफ" तो  कुछ सोच समझ कर और बहुत कुछ अनुभव करके ही कहा है।  साले सौ प्रतिशत प्राकृतिक होते हैं। यानी जितने हैं उतने ही मिलेंगे, न एक कम न एक ज्यादा । लालची दूल्हा दहेज में पाँच लाख रुपए कम लेकर दो एक्स्ट्रा सालों की डिमांड करे तो केस बिगड़ सकता है। शादी के मंडप में भगवान खुद मौजूद होते हैं लेकिन उनके लिए भी 'ऑन द स्पॉट' साला सप्लाई संभव नहीं है।  इसलिए होशियार लोग शादी के लिए लड़की बाद में देखते हैं, पहले उसके भाइयों की गिनती कर लेते हैं। यह काम प्रायः मामा यानी बाप के साले करते हैं।  भाई तगड़े हों तो तगड़ी बहन की भी शादी हो जाती है, वरना ऐरे गैरे लड़के अच्छी भली और गुणी लड़कियों को रिजेक्ट करते फिरते हैं।

अब तो जमाना बदल गया है ।  साले एक या दो ही होते हैं जिनकी एलईडी बल्ब की तरह साल भर की गारंटी होती है । उसके बाद वो जीजा को देख कर रौशन हो पड़ें यह जरूरी नहीं है। नए जमाने के सालों को नरम बनाए रखने के लिए जीजा को दुगना नरम होना पड़ता है । बल्कि कई बार तो पिलपीला तक हो जाना पड़ता है। ऐसी कई मिसाइलें हैं जहां जीजा की रीढ़ की हड्डी टेढ़ी थी उसे सालों ने फिजियोथेरेपी दे कर सीधी की। आपने भी लोगों को कहते सुना होगा कि डॉक्टर होते तो अच्छे हैं लेकिन साले जांचें बहुत सारी लिख देते हैं।  रिश्तेदारी के मामले में साले जीजा के बीच 'जांच' का रिश्ता महत्वपूर्ण होता है। आजकल जगह-जगह लिखा होता है कि सावधान आप कैमरे की निगाह में हैं। शादीशुदा आदमी के लिए यह कैमरा साला होता है । साले और जीजा की पूरी उम्र एक दूसरे पर निगाह रखने में गुजर जाती है। दोनों एक ही बात सोचते हैं कि मौका कब मिलेगा । कब आएगा ऊंट पहाड़ के नीचे ।  

इधर एक मांगीलाल माले जी हैं। बताते हैं कि शादी के कुछ बरस बाद उन्होंने एक कार खरीदी थी । बड़े अरमान थे कि खुद शान से चलाएंगे। अरमानों पर किसी का कॉपीराइट नहीं होता है। यही अरमान उनके साले साहब का भी था। साले साहब ने जीजा माले के लिए एक ड्राइविंग स्कूल सेट किया। ड्राइविंग स्कूल वालों का दावा था कि पंद्रह दिन में गाड़ी चलाना सिखा देंगे लेकिन माले को स्टीयरिंग पकड़ने में ही महीना भर लग गया। अभी तो ब्रेक, एक्सीलरेटर, क्लच, गियर और भी बहुत कुछ था जिसमें न जाने कितने महीने लगना तय थे। माले जी का कहना है कि साले कोच ने जानबूझकर नहीं सिखाया। और तो और तीन महीने की फीस एडवांस मांगने लगा, साला कोच कहीं का । लेकिन माले ने फीस नहीं दी और नई कार पोर्च में ख़डी रखने का मन बनाया लिया।  लोग कार देखते और पूछते कि चलाओगे कब! वह एक ही जवाब देते कि साले कोच ने जानबूझकर नहीं सिखाया। उनके मन में एक गुस्सा बैठ गया। जो भी आदमी उनके मन माफिक नहीं होता उसमें अब साला नजर आता । सोचते रहे कि दूसरा कोच साला कब मिलेगा पता नहीं। मौका ताड़ कर उनका अपना निजी साला बोला - " जीजा जी कब तक खड़ी गाड़ी में कपड़ा मारते रहोगे, बेचो बाचो और फुर्सत पाओ। " माले ने वैसे ही सहज भाव से कह दिया कि बेच दूंगा कोई ग्राहक मिला तो। इतना सुनते ही साले साहब डील  ड़न कर ली और एक लाख कम में शानदार कार ले उड़े । माले समझ ही नहीं पाए कि यह क्या हो गया। कार गुजर गईं गुबार देखते रहे।

अब वे बात बात पर साले को चबाते हैं । बोले साला टरम्प बेवकूफी कर रहा है पूरी दुनिया परेशान हो रही है । कल स्कूटर में पेट्रोल लेने गया तो साले ने दिया नहीं बोला खतम हो गया । तुम्हें पता है सालों ने दूध भी महँगा कर दिया ! कल बाजार गया तो सब साले मूँ फाड़ने लगे । इधर शेयर बाजार देखो तो साला गिरता ही जा रहा है । उनके लिए पूरी दुनिया सालों से भरी है और वे जगत जीजा है ।

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