बात बहुत पुरानी है । सच बात यह है जब आपको बहुत ताजा बात भी कहना हो तो उसे पुरानी बताते हुए कहना अच्छा होता है । जो समझते हैं वो समझ जाते हैं कि नयी है और जो नहीं समझते हैं वो समझते हैं कि पुरानी है । इस तरह नयी में पुरानी और पुरानी में नयी का आभास से संदेह अलंकर पैदा होता है । वो दोहा तो सुना ही होगा आपने – ‘सारी बीच नारी है कि नारी बीच सारी है ; नारी ही की सारी है कि सारी ही की नारी है ‘ । मतलब ये कि बात ... बहुत पुरानी है ।
बात
ये है कि राजा का जन्मदिन आ रहा था । यों तो जन्मदिन सबका आया करता है लेकिन उससे क्या
! खेत में फसल उतरती है उसी तरह जनता पैदा होती है । सुना है किसी देश में रोज एक
लाख बच्चे पैदा होते हैं । हर सेकेण्ड में एक तो समझ ही लीजिये । ऐसे में आप बताइए
इनका पैदा होना भी कुछ होना है ! असल पैदा होना राजा का होता है । बड़ी मुश्किल से,
बड़ी मन्नतों और होम-हवन के बाद । यही वजह है कि दो हप्ते पहले से जन्मदिन की
अग्रिम खुशियाँ मनाई जा रहीं हैं । आसपास लगे रहने वालों के पेट और जेब दोनों भर
गए हैं लेकिन मन नहीं भर रहा है । मन तो राजा का भी नहीं भरा है किसी बात से । दिन
में पांच वक्त बदलने के लिए तमाम शेरवानियाँ वस्त्रागार में टंगी हैं । जूतियों की
नक्काशीदार जोड़ियों से जूताखाना भरा हुआ है । चिरागों की संख्या दुगनी कर दी गयी
है । महल विशेष दमक रहा है । रनिवास से इत्र-फुलेल के भभके उठ रहे हैं । महल जैसे
स्वर्ग का आउट हाउस है ।
रात
हुई राजा अपने कुछ मुँहलगे मंत्रियों के साथ खुले आकाश के नीचे एकांत का आनंद ले रहा
था । अचानक राजा ने कहा – मुझे ये चाँद
उदास लग रहा है !!
मंत्रियों
ने एक स्वर में कहा – आप ठीक कह रहे हैं राजन, चाँद उदास लग रहा है ।
“इसे
प्रसन्न होना चाहिए । हमारा जन्मदिन आने वाला है ।“ कहते हुए उन्होंने पर्यावरण
मंत्री की और देखा ।
“जी
राजन, कल चाँद को खुश रहने के लिए कह दिया जायेगा ।“
“महल
के बाग में मोर और बत्तखें थीं ! वो कहाँ दुबकी हैं ?”
“राजन,
मोरों को कल दरबार में नृत्य के आदेश दिए जा चुके हैं, बत्तखों को भी समूह नृत्य
के लिए कहा जा चुका है । जो नहीं आयेंगी वो कल शाम को परोसी जाएँगी । “
“हमें
लगता है हमारी सेना भी अन्दर से प्रसन्न नहीं है । क्या सेना को हमारे जन्मदिन की
ख़ुशी नहीं है ?” कुछ देर सोचते हुए राजा ने रक्षामंत्री से सवाल किया ।
“राजन
सेना में ऐसा कोई नहीं जिसे आपके जन्मदिन की ख़ुशी नहीं हो । लेकिन महंगाई के कारण
उनकी ख़ुशी कमजोर पड़ रही है । किन्तु आप चिंता न करें कल से जन्मदिन तक सारे सैनिक
बाकायदा प्रसन्न रहेंगे । यदि कोई उदास रहा तो बर्खास्त किया जायेगा ।“
“रियाया
में भी उत्साह नहीं है ! उसे भी प्रसन्न रहना चाहिए । नाचें-कूदें, गायें-बजाएं,
अच्छे परिधान पहनें,तरह तरह के उपहार ले कर आयें और अपनी भावना व्यक्त करें । क्या
उन्हें पता नहीं कि राजा का जन्मदिन है ! ... गृहमंत्री, आपका खुपिया विभाग क्या
कर रहा है ?”
गृहमंत्री
ने हाथ जोड़ कर कहा – “राजन बेहतर होगा कि जन्मोत्सव महल की सीमा में ही संपन्न
किया जाये । जनता महंगाई, बेरोजगारी, संस्थाओं पर अपराधियों के कब्जे से बहुत दुखी
और क्रोधित भी है । लोग न्याय व्यवस्था को भी संदेह से देखने लगे हैं । आय कम और कर बहुत ज्यादा हो गए हैं ऐसे में
उन्हें तीन दिनों तक खुश रहने का आदेश देना जोखिम भरा है ।“
“चुनौतियाँ
और विपरीत परिस्थितियां तो हर समय आती रहती हैं । ... क्या अपने अब तक कुछ नहीं
किया !? आपको गृहमंत्री इसलिए बनाया था कि अपने हो और पुराना रिकॉर्ड भी जोरदार है
!” राजा ने ऑंखें चौड़ी करते हुए कहा ।
“सारे
नौकरीपेशा खुश रहे आदेश जारी कर दिए हैं । हर कर्मचारी को अपने विभाग प्रमुख से अपनी
प्रसन्नता प्रमाणित करवा कर गृह मंत्रालय को भेजने के लिए निर्देशित किया गया है ।
विभाग प्रमुख अपनी प्रसन्नता स्वयं सत्यापित कर मंत्रालय को भेजेंगे । दिक्कत व्यापारियों,
छोटा मोटा धंधा करने वालों, पकौड़ा बनाने वालों, फेरी वालों से है । खादी पहनने
वाले मानेंगे नहीं, उस दिन सुबह से उपवास रखने वाले हैं ।“ हाथ जोड़ते हुए गृह
मंत्री ने निवेदन किया ।
सामने
खड़े धन मंत्री की और राजा ने देखा ... कहा कुछ नहीं । धन मंत्री ने राजा की आँखों
में झाँका और समझ गया ... कहा कुछ नहीं । रात गहरा चुकी थी । आसपास से उल्लुओं की
आवाजें आने लगी । सुनते ही राजा प्रसन्न हुआ । बोला – चलो तुम लोगों के आलावा कोई
तो है जो खुश हो रहा है ।
मंत्री एक स्वर में चहके – साक्षात् लक्ष्मी के
वाहन हैं राजन ... शुभ है ... मंगल है ... मुबारक हो जन्मदिन ... हुजूर सलामत रहें
और जन्म जन्मान्तर तक सिंहासन पर बने रहें ।
दूसरे
दिन पेट्रोल का दाम बीस पैसे कम कर दिया गया । जनता खुश हो गयी । सरकार को पता है
कि बीस पैसे की ये ख़ुशी तीन दिन तो आराम से टिक जाएगी ।
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