मंगलवार, 23 जून 2026

सोने से आलू, आलू से समोसे : समोसे हजम, खेल ख़तम


 



 किसी भी मंदिर में अगर चोरी हो जाए तो उसे चोरी नहीं कहा जाना चाहिए। चोरी उसे कहते हैं जिसे चोर करें। भक्तों द्वारा की गई चोरी पूजा का प्रतिफल है। अट्ठारह प्रतिशत चढ़ावा पुजारी ले सकते हैं । मंदिर चलाना देश चलाने से छोटा काम नहीं है। जहां भगवान खुद सामने खड़े हों वहां से सामान उठा लेना चुनौती पूर्ण है। लेकिन जहां चाह होती है वहां राह भी हो जाती है। कहते हैं हिम्मत ए मर्दा मदद ए खुदा। भगवान की मौजूदगी में तो महाभारत का युद्ध जीत लिया था पाण्डेवों ने। भगवान शयन को चले जाएं या भजन के आनंद में लीन हो जाएं तो उनकी चालीस किलो चांदी की पादुकाएं हों या गले का स्वर्ण हार,  गायब कर लेना कोई बड़ा काम नहीं है। 


 सब जानते हैं कि कोई भी काम भगवान की मर्जी के बगैर नहीं हो सकता है। प्रभु की इच्छा थी कि सेवक अपनी दरिद्रता दूर कर लें तो कर ली । रोजाना गाड़ी भर चढ़ावा आ रहा है तो उसमें से एक दो टोकरी कोई ले लेवे तो किसी को पता नहीं पड़ेगा। अगर खास सेवक ही करोड़पति नहीं बन सकेंगे तो भगवान की प्रतिष्ठा पर प्रश्नचिन्ह लग जाएंगे । भगवान को जब कुछ करवाना होता है तो वे काम के अनुरूप बुद्धि देते हैं और हिम्मत भी। भगवान की ही इच्छा है की भक्तगण प्रसाद लेते रहें तो इसमें पाप कैसा और कैसा अपराध । यह तो प्रभु कृपा है। राम की चिड़िया राम का खेत, खा ले चिड़िया भर भर पेट। विरोधी दल वाले  छाती कूट रहे हैं कि करोड़ों गायब हो गए, जलकुकड़े, नास्तिक कहीं के। क्या इन्हें पता नहीं कि जब भगवान देते हैं तो छप्पर फाड़ कर देते हैं। और जब देने वाला राजी है,  लेने वाला राजी है तो बाकी को क्या तकलीफ है भाई। मंदिर में लोग अपने स्वेच्छा से चढ़ावा चढ़ाते हैं। किसी को चढ़ने का नोटिस नहीं भेजा जाता है। और फिर यह समझ लेना चाहिए कि भगवान का घर किसी भी सत्ता या सरकार से बड़ा होता है। भगवान का निवास क्षेत्र किसी भी कानून के दायरे में भी नहीं आता है। जान लेओ कि भगवान के हाथ कानून के हाथ से ज्यादा लंबे होते हैं। उनको कुछ गलत लगेगा तो वो खुद गला पकड़ लेंगे। भगवान की अनुमति से, भगवान की उपस्थिति में, पूरी निष्ठा और विश्वास के साथ जो भी किया जाता है वह सब पूजा है। कानून चाहे उसे चोरी समझता हो तो समझे। जब संविधान बदलने या रद्द करने का समय आएगा तब इन बातों को ध्यान में रखा जाएगा, समझे! 


 याद करो विपक्ष आलू से सोना बनाने का फार्मूला बताता रह गया। नाकारा लोग जनता के सामने झूठ बोलते रहे । इधर अंदर की बात बताएं!? पता चला है कि जो  चांदी सोना लेकर गए हैं उन्होंने उसका आलू बना दिया है। ठीक है,  कहने वाले कहेंगे कि आलू से सोना बनाना था, काम उल्टा कर दिया । लेकिन सोने से आलू बनाने का चमत्कार तो हुआ है ना!? इससे कोई इनकार नहीं कर सकता है । उस पर बड़प्पन देखिए की कोई ढोल नहीं पीटा, किसी ने मूंछ नहीं बलीं।  किसी को पता भी नहीं चला और सोने से आलू बना दिया!! पुराना मीडिया होता तो पीछे पड़ जाता कि "आलू कहाँ गया, आलू कहां गया" !? थेंक्यू नया मिडिया। आप सब जानते हैं कि आलू समोसे में बदल जाता है । सोने से आलू, आलू से समोसे, समोसे हजम, खेल ख़तम । चाहे तो कोई अभिनेता हाथ में माइक लेकर जनता से पूछ सकता है कि आप लोग समोसा कैसे खाते हैं? हरी चटनी से या इमली की चटनी से? कितने समोसे खाने के बाद रुकी हुई कृपा रिलीज हो जाती है ? वगैरह। कुछ लोग जांच बैठाने की मांग कर रहे हैं। ठीक है जाँच बैठा लो। भगवान कोई आपत्ति नहीं करेंगे। जांच से ही पता चलेगा कि चोरी नहीं हुई है,  सिर्फ आरोप लगे हैं। आरोपों के लिये विपक्ष जिम्मेदार है। उसका काम है वह करता रहे। देवभूमि में कुछ घटित हुआ भी होगा तो उसे हम मिल बैठकर समझ लेंगे। मामले को कानून के सामने रख कर चोरी करने वालों का सम्मान नहीं गिराया जाएगा। भक्तों को सजा देने का अधिकार केवल भगवान को है। उन्हें आज नहीं तो कल, परसों, महिनों, बरसों में सजा मिलेगी, पर मिल जाएगी। भक्तजनों तब तक अपनी आस्था कायम रखो और चढ़ावा आने दो। ज्यादा हो। 


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