रविवार, 18 अक्टूबर 2026

​जो दोषी होंगे, उन्हें बक्शा नहीं जाएगा


 






​डिप्टी दोषी साहब ने पत्रकारों को उँगली दिखाते हुए आत्मविश्वास के साथ कहा— "अगर पकड़े गए, तो दोषियों को बक्शा नहीं जाएगा। सरकार बहुत सख़्ती से भ्रष्टाचार पर निगाह रखे हुए है। कोई कितना भी अमीर या शातिर क्यों न हो, पुलिस उचित कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगी। देश काफ़ी खोखला हो गया है। पुल गिर रहे हैं, सड़कें धंस रही हैं। अब किसी को भ्रष्टाचार की इजाजत नहीं दी जाएगी।"

​"क्या करेंगे सर उनका? जेल में बंद करेंगे या फिर सीधे एनकाउंटर...?"

​"देखिए, एकदम से एनकाउंटर ठीक नहीं है। आख़िर यह बापू का देश भी है। वे कह गए थे कि कोई एक गाल पर थप्पड़ मारे, तो दूसरा गाल आगे कर देना चाहिए। जो पहली बार भ्रष्टाचार करेंगे, उन्हें दूसरा मौका दिया जाएगा। इसलिए हम पहले जाँच करेंगे। पता लगाएंगे कि आदतन दोषी 'कौन' है। लेकिन यह पक्का है कि किसी को बक्शा नहीं जाएगा।" ​उन्होंने हाथ से शांत रहने और सवाल न पूछने का इशारा किया। गोदीदार चाय-समोसों को उपकृत करने में लग गए।

​लेकिन कुछ पत्रकार ऐसे थे जो पाएदार थे। उनमें से एक सवाल आया— "सबको पता है कि दोषी कौन है, फिर जाँच की आवश्यकता क्यों है, आदरणीय?"

​"इसलिए कि जाँच से ही पता पड़ता है कि दोषी 'कौन' है। जैसे ही पता पड़ेगा, कार्रवाई की जाएगी। आप निश्चिंत रहिये, किसी को बक्शा नहीं जाएगा।"

​"घटना का वीडियो बना हुआ है सर! सारी दुनिया को दोषी साफ़ दिखाई दे रहा है।"

​"देखिए, जल्दबाज़ी में कोई काम नहीं होना चाहिए। हमारी सरकार संविधान का बहुत सम्मान करती है। बापू ने कहा था कि भले ही सौ अपराधी छूट जाएं, पर किसी निरपराधी को सजा नहीं मिलनी चाहिए। जाँच एजेंसियाँ अपना काम करेंगी। वीडियो में घटना दिख रही है, आदमी दिख रहा है, लेकिन वह 'कौन' है, यह तो जाँच से पता चलेगा। जाँच ठीक से हो जाएगी, तो पता चल जाएगा। लेकिन किसी को बक्शा नहीं जाएगा।" ​हाथ ऊँचा करके उन्होंने 'ॐ शान्ति' भी कह दिया, जिसका मतलब था कि अब कोई नहीं बोलेगा। मौन।

​"सर जी, जाँच तो हमेशा लंबी चलती है। तब तक दोषी सिस्टम को मैनेज कर लेता है, या फिर बचाने वाली पार्टी में शामिल हो जाता है और दोषी ही नहीं रहता है!"

​"देखिए, हरेक अपराधी को अपने बचाव का अधिकार है। वो कहाँ बचेगा, कैसे बचेगा, कौन बचाएगा— यह सब देखना और उसके लिये प्रयास करना उसका अपना निर्णय होता है। रहा सवाल जाँच का, तो उसका एक कायदा है। बहुत सी बातें देखनी पड़ती हैं। वीडियो किसने बनाया है, पहले तो यही देखना पड़ेगा। वीडियो बनाने की उसकी मंशा क्या थी? अपोज़िशन वाले आजकल खूब वीडियो बनवा रहे हैं। उनका षड्यंत्र हो सकता है। कहीं वह विदेशी ताकतों के संपर्क में तो नहीं है? देशहित सबसे ऊपर है। जो सबूत दिखाए जा रहे हैं, उनकी सच्चाई जानना होती है। ज़रूरी लगा, तो वीडियो बनाने वाले पर सख़्त कार्रवाई की जाएगी।... आप लोग समोसा खाइए, नहीं तो ठंडा हो जाएगा।"

​"वीडियो में साफ़ दिख रहा है सर कि वो आदमी अपराध कर रहा है!! उसकी गिरफ़्तारी कब होगी?!"

​"वीडियो में दिख रहा है ना? इसीलिए वीडियोग्राफ़र को पहले तलब किया जाएगा। उसका कैमरा भी चेक किया जाएगा। असली बात को समझिए, आजकल विदेशी कैमरों के ज़रिए दुश्मन देश जासूसी करवाते हैं। जाँच अच्छे से की जाएगी और जो भी दोषी होगा, उसको बक्शा नहीं जाएगा।... चलिए, 'जन गण मन' हो जाए।"

​"सर, वीडियो वायरल है। जनता ने देख लिया है कि अपराधी कौन है। ऐसे में क्या करेंगे?"

​"जाँच की जाएगी कि वायरल करने वाले कौन-कौन हैं। सब पर कार्रवाई होगी। और जो दोषी होंगे, उन्हें बक्शा नहीं जाएगा।... जै हिंद।"

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